भाद्रपद की चतुर्थी से शुरू होता है गणेश चतुर्थी – रंग-बिरंगे पंडाल, फूलों की खुशबू और भक्ति का अनोखा माहौल।
भगवान गणेश के जन्म का 10 दिनी पर्व भक्ति, उत्साह और खुशियों से हर दिल को भर देता है, घर-घर में मंगलमय माहौल बनाता है।
गणेश चतुर्थी
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से प्रारंभ होकर 10 दिनों तक चलने वाला यह अद्भुत और पावन पर्व श्रद्धा और आनंद का संदेश देता है।
तिथि
घर और पंडाल रंग-बिरंगे फूलों, लाइटों व भव्य सजावट से गणपति स्वागत में जगमगा उठते हैं, भक्तों का मन मोह लेते हैं।
सजावट
मंत्रोच्चार के साथ गणेश प्रतिमा में जीवन का आह्वान होता है, यह भक्ति और आस्था का अद्वितीय व पावन क्षण होता है।
प्राणप्रतिष्ठा
लाल चंदन, गेंदा, नारियल, गुड़ व 21 मोदकों के साथ गणपति का विधिवत पूजन होता है, जो सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देता है।
पूजन
21 मोदक गणपति का प्रिय भोग है, जिसे अर्पित करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने और जीवन में सुख-समृद्धि आने का विश्वास है।
मोदक प्रेम
ढोल-ताशों की गूंज, नृत्य और भक्ति गीतों की मधुर लय से पंडाल का हर कोना भक्तिमय हो जाता है और माहौल उल्लास से भर जाता है।
भजन-कीर्तन
"गणपति बप्पा मोरया" के नारों संग भक्त ढोल-ताशे बजाते, नाचते-गाते प्रतिमा का नदी या समुद्र में धूमधाम से विसर्जन करते हैं।
विसर्जन
गणपति विसर्जन हमें जीवन की अस्थिरता और विदाई के क्षण में भी श्रद्धा, विनम्रता और प्रेम का महत्व सिखाता है।
संदेश
महाराष्ट्र से लेकर विदेशों तक गणेश चतुर्थी आज भक्ति, उत्साह और भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक बन चुकी है।
विश्वभर में उत्सव