देश में बढ़ती LPG supply crunch यानी एलपीजी की कमी अब कई उद्योगों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो इसका असर रेस्टोरेंट, ग्लास मैन्युफैक्चरिंग, प्लास्टिक उद्योग और FMCG कंपनियों तक दिखाई दे सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, एलपीजी की कमी से क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) चेन के संचालन पर असर पड़ सकता है और उपभोक्ता कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है।
LPG supply crunch क्यों बढ़ रहा है?
ब्रोकरेज फर्म Goldman Sachs की रिपोर्ट के अनुसार भारत में एलपीजी की भारी मांग है और देश अपनी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत LPG आयात करता है। चिंता की बात यह है कि इस आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है, जो मौजूदा समय में भू-राजनीतिक तनाव के कारण बेहद संवेदनशील क्षेत्र बना हुआ है। हालांकि देश में एलपीजी का घरेलू उत्पादन 25 प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन इसके बावजूद LPG supply crunch की समस्या बनी हुई है।
सरकार ने बदली गैस सप्लाई की प्राथमिकता
एलपीजी की कमी को देखते हुए सरकार ने गैस सप्लाई की प्राथमिकताओं में बदलाव किया है। अब सबसे पहले एलपीजी की सप्लाई इन क्षेत्रों को दी जा रही है:
- घरेलू रसोई गैस
- अस्पताल
- जरूरी सेवाएं
इसके चलते कई कमर्शियल सेक्टर, जैसे रेस्टोरेंट और कुछ उद्योगों को मिलने वाली एलपीजी सप्लाई सीमित कर दी गई है। यही वजह है कि LPG supply crunch का असर धीरे-धीरे कई उद्योगों पर दिखाई देने लगा है।
QSR चेन पर मंडरा रहा संकट
देश की बड़ी क्विक सर्विस रेस्टोरेंट चेन, जैसे:
- Jubilant FoodWorks
- Devyani International
- Sapphire Foods India
- Westlife Foodworld
अपने किचन संचालन के लिए बड़े पैमाने पर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर रहती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कई रेस्टोरेंट के पास एलपीजी सिलेंडर का स्टॉक सिर्फ एक हफ्ते से भी कम बचा है। अगर LPG supply crunch जारी रहती है तो इन रेस्टोरेंट्स के लिए सामान्य मांग को पूरा करना मुश्किल हो सकता है। इससे उनकी आय पर भी अस्थायी असर पड़ सकता है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में तो यह भी कहा गया है कि गैस की कमी के कारण कुछ रेस्टोरेंट्स को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है।
ग्लास उद्योग भी प्रभावित
एलपीजी और गैस की कमी का असर केवल रेस्टोरेंट उद्योग तक सीमित नहीं है। ग्लास मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां भी इससे प्रभावित हो रही हैं। प्रमुख कंपनी Borosil Ltd ने कहा है कि उनके उत्पादन संयंत्रों में गैस की कमी के कारण उत्पादन घटाना पड़ा है। अगर ग्लास उत्पादन में कमी आती है तो इसका सीधा असर शराब बनाने वाली कंपनियों पर पड़ेगा।
शराब कंपनियों की लागत बढ़ सकती है
ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार ग्लास की कीमतों में बढ़ोतरी से शराब कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। उदाहरण के लिए United Spirits जैसी कंपनियों के लिए ग्लास उनकी कुल उत्पादन लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होता है। ऐसे में अगर LPG supply crunch के कारण ग्लास महंगा होता है तो शराब कंपनियों के उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं।
प्लास्टिक की कीमतें भी बढ़ सकती हैं
सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे प्रोपेन, ब्यूटेन और प्रोपाइलीन को एलपीजी उत्पादन के लिए इस्तेमाल करें। इस कदम से एलपीजी उत्पादन तो बढ़ सकता है, लेकिन इससे पेट्रोकेमिकल उद्योग के लिए कच्चे माल की सप्लाई कम हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो प्लास्टिक की कीमतें बढ़ने की आशंका है। FMCG कंपनियों पर असर प्लास्टिक की कीमतों में वृद्धि का असर सीधे FMCG कंपनियों पर पड़ेगा। इन कंपनियों के कई उत्पादों की पैकेजिंग और उत्पादन प्रक्रिया में प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है। इसलिए अगर LPG supply crunch की वजह से प्लास्टिक महंगा होता है तो FMCG कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है।
- भारत में LPG सप्लाई से जुड़ी नीतियों की जानकारी India LPG policy में देखी जा सकती है।
- ऊर्जा बाजार के विश्लेषण के लिए global LPG market report भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
LPG आयात का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से
एक अलग रिपोर्ट में ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal Financial Services ने कहा कि भारत के 90 प्रतिशत LPG आयात पश्चिम एशिया के देशों से आते हैं।
इनमें प्रमुख देश हैं:
- कतर
- सऊदी अरब
- यूएई
- कुवैत
रिपोर्ट के अनुसार भारत के लगभग 80–85 प्रतिशत LPG आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरते हैं। इस वजह से LPG supply crunch के लिए यह मार्ग बेहद संवेदनशील बन जाता है।
ऐसी ही और दिलचस्प News के लिए हमारी वेबसाइट फॉलो करें।
भारत के पास LPG का रणनीतिक भंडार नहीं
रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। भारत के पास कच्चे तेल की तरह एलपीजी का रणनीतिक भंडार नहीं है। इसका मतलब है कि अगर सप्लाई में बाधा आती है तो उसका असर तुरंत बाजार में दिखने लगता है, खासकर कमर्शियल सेक्टर में। रेस्टोरेंट्स में गैस की खपत कितनी होती है?
उद्योग के आंकड़ों के अनुसार:
- छोटा रेस्टोरेंट: 1–2 सिलेंडर (19kg) प्रतिदिन
- मध्यम रेस्टोरेंट: 3–5 सिलेंडर प्रतिदिन
- बड़े होटल किचन: 6–10 सिलेंडर प्रतिदिन
लेकिन ज्यादातर रेस्टोरेंट्स के पास सिर्फ 2–6 दिन का स्टॉक ही रहता है।
48–72 घंटे में पड़ सकता है असर
रिपोर्ट के मुताबिक अगर गैस सप्लाई बाधित होती है तो 48 से 72 घंटे के भीतर रेस्टोरेंट संचालन प्रभावित हो सकता है। इसका कारण यह है कि रेस्टोरेंट्स में एलपीजी स्टोर करने की क्षमता सीमित होती है। स्टोरेज नियम भी बड़ी बाधा नियमों के अनुसार अगर किसी जगह पर 100 किलो से ज्यादा एलपीजी (लगभग 5 सिलेंडर) स्टोर करना है तो इसके लिए विशेष लाइसेंस और सुरक्षा मानकों का पालन करना पड़ता है। इस वजह से छोटे रेस्टोरेंट्स के लिए ज्यादा गैस स्टॉक करना संभव नहीं होता।
Related Video: India LPG Crisis: Gas Cylinder Shortage Across Cities 🚨
कुल मिलाकर LPG supply crunch भारत के कई उद्योगों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अगर गैस सप्लाई में सुधार नहीं हुआ तो इसका असर रेस्टोरेंट, ग्लास उद्योग, FMCG कंपनियों और उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल सरकार घरेलू उपभोक्ताओं और जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता देकर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक LPG supply crunch रहने पर आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
—- समाप्त —- ◉






