भारत और बलूचिस्तान के बीच दशकों नहीं, बल्कि सदियों पुराने रिश्तों की एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। वजह है पाकिस्तान की जमीन से भारत के विदेश मंत्री Jaishankar को लिखा गया एक खुला पत्र, जिसने सोशल मीडिया से लेकर राजनयिक हलकों तक हलचल मचा दी है। इस पत्र में बलूच नेता मीर यार बलूच ने न सिर्फ 140 करोड़ भारतीयों और भारतीय संसद को नए साल 2026 की शुभकामनाएं दी हैं, बल्कि भारत-बलूचिस्तान के सांस्कृतिक, व्यापारिक और धार्मिक संबंधों को भी मजबूती से सामने रखा है। साथ ही, इसमें चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को लेकर एक गंभीर चेतावनी भी दी गई है, जिसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं कि यह खुला पत्र क्या है, इसमें Jaishankar को क्या संदेश दिया गया है और क्यों यह खबर भारत-पाकिस्तान और पूरे दक्षिण एशिया के लिए मायने रखती है।
खुला पत्र: Jaishankar को क्या कहा गया?
जनवरी 2026 की शुरुआत में बलूच नेता मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री Jaishankar के नाम यह खुला पत्र लिखा। इस पत्र की खास बात यह है कि इसमें भारत पर कोई आरोप नहीं लगाया गया, बल्कि समर्थन, दोस्ती और भरोसे की बात खुलकर कही गई है। मीर यार बलूच ने लिखा कि भारत और बलूचिस्तान के रिश्ते कोई नए नहीं हैं। ये रिश्ते इतिहास, संस्कृति और व्यापार से जुड़े हुए हैं और समय के साथ और मजबूत होते गए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत हमेशा से बलूच लोगों के लिए एक भरोसेमंद दोस्त रहा है और आगे भी रहेगा।
पत्र की शुरुआत में ही Jaishankar को संबोधित करते हुए उन्होंने 140 करोड़ भारतीयों और संसद के सदस्यों को नए साल 2026 की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि नया साल दोनों समाजों के बीच पुराने रिश्तों को और गहरा करने का अवसर लेकर आया है।
भारत और बलूचिस्तान के सदियों पुराने रिश्ते
भारत के विदेश मंत्री Jaishankar के नाम यह खुला पत्र में भारत और बलूचिस्तान के बीच चले आ रहे सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों पर खास जोर दिया गया है। मीर यार बलूच ने हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) का उदाहरण देते हुए बताया कि यह स्थल दोनों समुदायों की साझा विरासत का प्रतीक है। यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थान नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे भारतीय और बलूच समाज सदियों से एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं। व्यापारिक रास्ते, सांस्कृतिक मेल-जोल और धार्मिक आस्थाएं इन रिश्तों की नींव रही हैं।
पत्र में यह बात साफ झलकती है कि इतिहास आज भी जिंदा है और भारत-बलूचिस्तान के रिश्ते केवल राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।
चीन-पाकिस्तान गठजोड़ पर बड़ी चेतावनी
इस पत्र का सबसे अहम और चर्चा में रहने वाला हिस्सा चीन और पाकिस्तान की संभावित सैन्य गतिविधियों को लेकर है। मीर यार बलूच ने चेतावनी दी है कि अगर बलूचिस्तान की रक्षा क्षमताओं को समय रहते समर्थन नहीं मिला, तो आने वाले महीनों में चीन बलूचिस्तान की धरती पर अपने सैनिक तैनात कर सकता है।
उनके मुताबिक, यह कदम न सिर्फ बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के लिए खतरा होगा, बल्कि भारत की सुरक्षा और पूरे क्षेत्र की शांति पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने लिखा कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और इसके बहाने चीन बलूचिस्तान में सैन्य प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। यह सब कुछ स्थानीय लोगों की मर्जी के बिना किया जा रहा है, जिसे उन्होंने “भारत और बलूचिस्तान दोनों के लिए अकल्पनीय चुनौती” बताया।
2026 में “Global Diplomatic Week” की घोषणा
मीर यार बलूच ने अपने पत्र में यह भी बताया कि मई 2025 में संघर्ष के बाद बलूचिस्तान ने अपनी स्वायत्तता का ऐलान किया था। अब इसी कड़ी में 2026 के पहले सप्ताह में “Global Diplomatic Week” आयोजित करने की योजना बनाई गई है। इस पहल का मकसद दुनिया भर के देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संस्थानों से सीधे संवाद करना है। साथ ही, पाकिस्तान के पिछले 79 वर्षों के कथित दमनकारी शासन के खिलाफ वैश्विक समर्थन जुटाना भी इसका अहम उद्देश्य बताया गया है।
यह कार्यक्रम बलूचिस्तान की एक स्वतंत्र पहचान को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी आवाज को और बुलंद करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत को बताया भरोसेमंद साथी
पत्र में भारत को सिर्फ एक पड़ोसी देश नहीं, बल्कि बलूचिस्तान के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद साथी बताया गया है। मीर यार बलूच ने लिखा कि भारत ने हमेशा शांति, विकास और स्थिरता का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, विकास और सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में भारत का रुख साफ और सकारात्मक रहा है। यही वजह है कि बलूच लोगों का भारत पर भरोसा बना हुआ है। मीर यार बलूच के शब्दों में, “बलूचिस्तान के लोगों ने पिछले 79 वर्षों से पाकिस्तान की नीतियों और मानवाधिकार उल्लंघनों को झेला है। अब वक्त आ गया है कि इस स्थिति को जड़ से बदला जाए और स्थायी शांति की ओर बढ़ा जाए।”
राजनयिक और क्षेत्रीय महत्व
यह खुला पत्र सिर्फ एक व्यक्तिगत संदेश नहीं है, बल्कि इसे एक बड़ा राजनीतिक और सामरिक बयान माना जा रहा है। इसमें भारत-पाकिस्तान के रिश्तों, चीन के रणनीतिक इरादों और बलूचिस्तान की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका all एक साथ दिखाई देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि Jaishankar के नाम यह पत्र इस बात का संकेत है कि बलूच नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता भारत को एक ऐसे देश के रूप में देख रहे हैं, जो क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को लेकर गंभीर है।
निष्कर्ष:- यह खुला पत्र केवल नए साल की शुभकामनाओं तक सीमित नहीं है। यह दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक अहम संकेत देता है।
- इसमें Jaishankar को सीधे संबोधित कर भारत को भरोसेमंद और मजबूत साझेदार बताया गया है।
- चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को लेकर चेतावनी दी गई है।
- और “Global Diplomatic Week” जैसे कदम बताते हैं कि बलूचिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी में है।
कुल मिलाकर, यह पत्र भारत-बलूचिस्तान के रिश्तों को नई मजबूती देता है और आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति में बड़े बदलावों की ओर इशारा करता है।
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