अगर आपने बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस (Bajaj Allianz General Insurance) या केयर हेल्थ इंश्योरेंस (Care Health Insurance) की पॉलिसी ली है, तो आपके लिए यह बेहद चिंताजनक खबर है। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बड़े निजी अस्पतालों ने साफ घोषणा कर दी है कि 1 सितंबर 2025 से इन दोनों कंपनियों के तहत कैशलेस इलाज (Cashless Treatment) की सुविधा बंद कर दी जाएगी।
अस्पतालों का कहना है कि यह कदम मजबूरी में उठाना पड़ रहा है। दरअसल, इंश्योरेंस कंपनियों ने हाल ही में एक नया कॉमन इम्पेनलमेंट एग्रीमेंट (Common Empanelment Agreement) लागू किया है। अस्पताल प्रबंधन का आरोप है कि इस नए समझौते के तहत तय की गई शर्तें उनके लिए घाटे का सौदा (Loss-making Deal) साबित होंगी।
राजधानी भोपाल (Bhopal) के अलावा प्रदेश के अन्य बड़े शहरों जैसे इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के अस्पताल भी इस फैसले के समर्थन में खड़े हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कंपनियों और अस्पतालों के बीच विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो इससे लाखों मरीजों पर सीधा असर पड़ेगा, जिन्हें अब इलाज के लिए अपनी जेब से भुगतान करना होगा।
क्यों बढ़ी मरीजों की टेंशन?
नए कॉमन इम्पेनलमेंट एग्रीमेंट (Common Empanelment Agreement) के तहत अब छोटे और बड़े अस्पतालों को एक जैसी सर्जरी के लिए समान भुगतान किया जाएगा। बड़े अस्पतालों का कहना है कि उनकी इंफ्रास्ट्रक्चर लागत, डॉक्टरों की फीस, आधुनिक उपकरणों और स्टाफ खर्च छोटे अस्पतालों की तुलना में कहीं ज्यादा है। ऐसे में समान रेट पर इलाज करना उनके लिए घाटे का सौदा होगा।
इसके अलावा, पहले से ही इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट (Claim Rejection) होने और भुगतान में देरी (Payment Delay) जैसी बड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों का इलाज करने के बाद भी कई बार महीनों तक भुगतान नहीं मिलता या क्लेम पूरी तरह से खारिज कर दिया जाता है।
निजी नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रणधीर सिंह ने साफ कहा कि भोपाल समेत प्रदेश के सभी बड़े निजी अस्पताल इस फैसले के विरोध में हैं। उनका कहना है कि अगर इंश्योरेंस कंपनियां इस एग्रीमेंट में बदलाव नहीं करतीं, तो विरोध जारी रहेगा और मरीजों को इलाज के लिए अपनी जेब से खर्च करना पड़ेगा।
मरीजों के लिए क्या विकल्प?
- सबसे बड़ी राहत – आयुष्मान भारत योजना
मध्य प्रदेश के मरीजों के लिए राहत की बात यह है कि आयुष्मान भारत योजना ( Ayushman Bharat Yojana) पहले की तरह जारी रहेगी। जिन मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड है, उन्हें न केवल राजधानी भोपाल बल्कि पूरे प्रदेश के निजी और सरकारी अस्पतालों में कैशलेस इलाज (Cashless Treatment) की सुविधा मिलती रहेगी। इस योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाता है।
- हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी धारकों के लिए चिंता
दूसरी तरफ, जिन्होंने हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद रखी है और Cashless Treatment की उम्मीद कर रहे थे, उनके लिए यह फैसला बड़ा झटका है। बजाज आलियांज और केयर हेल्थ इंश्योरेंस के ग्राहकों को अब अस्पताल में इलाज करवाने के लिए पहले अपनी जेब से भुगतान करना होगा और बाद में क्लेम (Reimbursement Claim) करना पड़ेगा। इससे मरीजों और उनके परिवारों पर अचानक आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।

और जानकारी के लिए आप आयुष्मान भारत योजना की आधिकारिक वेबसाइट, IRDAI की हेल्थ इंश्योरेंस गाइडलाइन, Bajaj Allianz और Care Health Insurance पर विज़िट कर सकते हैं।
असर लाखों लोगों पर
अनुमान है कि सिर्फ मध्य प्रदेश में ही लाखों लोग इन दोनों कंपनियों की पॉलिसी रखते हैं। कैशलेस सुविधा बंद होने से न सिर्फ आम लोग बल्कि मिडिल क्लास परिवार भी प्रभावित होंगे, जिन्हें इमरजेंसी स्थिति में तुरंत कैश का इंतज़ाम करना मुश्किल हो सकता है।
नतीजा: मरीजों पर बढ़ेगा बोझ
नए फैसले का सीधा असर मरीजों पर पड़ेगा। 1 सितंबर से भोपाल (Bhopal) और पूरे मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज (Cashless Treatment) की सुविधा बंद हो जाएगी। अब मरीजों को इलाज के लिए पहले अपनी जेब से पैसा (Out of Pocket Payment) देना होगा और उसके बाद इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम (Reimbursement Claim) करना पड़ेगा।
- भोपाल से बड़ी खबर: 1 सितंबर से बंद होगा कैशलेस इलाज (Cashless Treatment)! लाखों मरीजों पर असर
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विशेषज्ञों का कहना है कि इससे खासकर मिडिल क्लास और इमरजेंसी मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत होगी, क्योंकि अचानक बड़े खर्च को संभालना आसान नहीं होता। कई बार मरीजों को तुरंत एडमिशन के लिए भारी रकम जुटानी पड़ सकती है।
स्वास्थ्य जानकार मानते हैं कि अगर यह विवाद लंबा खिंच गया, तो इसका असर पूरे राज्य की हेल्थकेयर सर्विसेज (Healthcare Services) पर पड़ेगा और मरीजों का भरोसा हेल्थ इंश्योरेंस पर से उठ सकता है।
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