भारत में बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने “Domestic Natural Gas Allocation Priority” नीति में बदलाव करते हुए घरेलू गैस के वितरण का नया क्रम तय किया है, ताकि रसोई गैस और वाहनों के लिए CNG की सप्लाई बिना रुकावट जारी रह सके। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसी वजह से सरकार ने पेट्रोकेमिकल जैसे कुछ सेक्टरों को मिलने वाली गैस में कटौती की है, ताकि घरों में इस्तेमाल होने वाली गैस और ट्रांसपोर्ट सेक्टर की जरूरतें पूरी की जा सकें।
Domestic Natural Gas Allocation Priority: LPG और CNG को मिली पहली प्राथमिकता
नई व्यवस्था के तहत “Domestic Natural Gas Allocation Priority” में सबसे पहले घरेलू रसोई गैस, CNG और पाइप के जरिए घरों तक पहुंचने वाली गैस की जरूरतों को पूरा किया जाएगा। इसका मतलब है कि अब इन सेक्टरों को उनकी पिछली छह महीनों की औसत खपत के आधार पर 100% गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश में कहीं भी रसोई गैस या CNG की कमी न हो।
पश्चिम एशिया संघर्ष का असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार इस संघर्ष के कारण भारत के लगभग 80% LPG आयात प्रभावित हुए हैं।भारत हर साल लगभग 21 मिलियन टन LPG आयात करता है और इसमें बड़ी मात्रा पश्चिम एशिया से आती है। जब इस सप्लाई में बाधा आई तो सरकार को Domestic Natural Gas Allocation Priority में बदलाव करने की जरूरत महसूस हुई।
LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश
सरकार ने तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करें।
इसके लिए रिफाइनरियों को कहा गया है कि:
- पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक को डायवर्ट करें
- प्राकृतिक गैस का उपयोग बढ़ाएं
- LPG उत्पादन में तेजी लाएं
इस कदम का उद्देश्य देश में रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखना है।
LPG कीमतों में बढ़ोतरी
ऊर्जा संकट का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ रहा है। हाल ही में LPG सिलेंडर की कीमत में 14.2 किलोग्राम सिलेंडर पर 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति में बाधा इसके मुख्य कारण हैं। फर्टिलाइज़र सेक्टर को दूसरी प्राथमिकता नई Domestic Natural Gas Allocation Priority नीति में उर्वरक उद्योग को दूसरी प्राथमिकता दी गई है। सरकार के आदेश के अनुसार:
- फर्टिलाइज़र प्लांट्स को उनकी पिछली छह महीनों की औसत मांग का कम से कम 70% गैस दी जाएगी।
- यह गैस केवल उर्वरक उत्पादन के लिए ही इस्तेमाल होगी।
- किसी भी प्लांट को मिली गैस दूसरे प्लांट को ट्रांसफर नहीं की जा सकेगी।
यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि खेती के लिए जरूरी खाद की सप्लाई प्रभावित न हो।
उद्योगों को तीसरी प्राथमिकता
तीसरे नंबर पर चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और अन्य औद्योगिक उपभोक्ता आते हैं। सरकार के अनुसार इन सेक्टरों को उनकी पिछली छह महीनों की औसत खपत का 80% गैस दी जाएगी, बशर्ते कि गैस की उपलब्धता पर्याप्त हो। CGD नेटवर्क को चौथी प्राथमिकता नई नीति में City Gas Distribution (CGD) कंपनियों को चौथे नंबर पर रखा गया है। इन कंपनियों के जरिए कई औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को गैस सप्लाई होती है। अब इन उपभोक्ताओं को भी उनकी औसत खपत का लगभग 80% गैस उपलब्ध कराया जाएगा। कहां से आएगी अतिरिक्त गैस सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक सेक्टरों की जरूरतें पूरी करने के लिए गैस की आपूर्ति कुछ अन्य क्षेत्रों से कम की जाएगी।
इनमें शामिल हैं:
- पेट्रोकेमिकल उद्योग
- गैस आधारित बिजली संयंत्र
- हाई-प्राइस गैस उपभोक्ता
उदाहरण के तौर पर पेट्रोकेमिकल कंपनियों में Oil and Natural Gas Corporation, GAIL India और Reliance Industries से जुड़े कुछ प्लांट्स प्रभावित हो सकते हैं।
Hormuz Strait में संकट
ऊर्जा संकट का एक बड़ा कारण समुद्री परिवहन में आई बाधा भी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बाद Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही में काफी कमी आई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद अहम है क्योंकि:
- लगभग 20% वैश्विक समुद्री तेल सप्लाई
- और लगभग एक तिहाई LNG शिपमेंट
इसी रास्ते से गुजरते हैं।
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भारत की गैस नीति और ऊर्जा डेटा से जुड़ी जानकारी Ministry of Petroleum and Natural Gas की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार और LNG सप्लाई पर अपडेट International Energy Agency की रिपोर्ट में भी देखा जा सकता है।
भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर असर
भारत अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। देश की कुल गैस खपत लगभग 191 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन है, जिसमें से करीब आधी घरेलू उत्पादन से पूरी होती है और बाकी आयात से। जब LNG टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है। घरेलू गैस का महत्व
प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल कई अहम क्षेत्रों में होता है, जैसे:
- बिजली उत्पादन
- उर्वरक निर्माण
- CNG के रूप में वाहनों का ईंधन
- पाइप गैस के जरिए घरेलू खाना पकाने
- LPG उत्पादन
यही कारण है कि सरकार ने Domestic Natural Gas Allocation Priority को बदलकर इन जरूरी क्षेत्रों की सप्लाई सुरक्षित करने का फैसला लिया है।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य है:
- घरेलू गैस की समान और सुरक्षित आपूर्ति
- प्राथमिक सेक्टरों की जरूरतों को पूरा करना
- ऊर्जा संकट के दौरान आम जनता पर असर कम करना
नई Domestic Natural Gas Allocation Priority नीति के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि देश के घरों में खाना पकाने की गैस और वाहनों के लिए CNG की सप्लाई बाधित न हो।
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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। Domestic Natural Gas Allocation Priority में बदलाव करके सरकार ने साफ कर दिया है कि सबसे पहले आम लोगों की जरूरतें पूरी की जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में देश की ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद कर सकता है, हालांकि उद्योगों पर इसका कुछ असर जरूर पड़ सकता है।
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