पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच India EU energy security talks ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ उच्च स्तरीय बातचीत की, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय हालात प्रमुख मुद्दे रहे। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने संकट के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को सबसे अहम रास्ता बताया।
India EU Energy Security Talks में पश्चिम एशिया संकट प्रमुख मुद्दा
हाल ही में पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। India EU energy security talks के दौरान भी इस मुद्दे पर विशेष चर्चा हुई। ईरान द्वारा Strait of Hormuz के रास्ते को लगभग बंद करने के बाद तेल और गैस की वैश्विक कीमतों में तेजी देखी गई है। यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित है और दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और LNG व्यापार का रास्ता यही है। भारत के लिए क्यों अहम है यह मुद्दा भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। इसलिए जब भी इस क्षेत्र में कोई संकट पैदा होता है तो उसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है। इसी वजह से India EU energy security talks के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया।
भारत-EU संबंधों को नई दिशा देने पर जोर
ब्रसेल्स में हुई इस बैठक के दौरान विदेश मंत्री S. Jaishankar ने जनवरी में हुए India-EU Summit के बाद रिश्तों में आई तेजी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को Free Trade Agreement (FTA) की पूरी क्षमता का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा रक्षा उद्योग सहयोग और समुद्री सुरक्षा साझेदारी को भी मजबूत करने की जरूरत बताई। Trade and Technology Council को मजबूत बनाने की बात India EU energy security talks के दौरान जयशंकर ने यह भी कहा कि India-EU Trade and Technology Council को अधिक परिणाम देने वाला मंच बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यह मंच तकनीकी सहयोग और व्यापार को नई दिशा दे सकता है।
भारत और EU के बीच बढ़ता सहयोग
विदेश मंत्रालय के अनुसार बातचीत के दौरान यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों ने भी भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए नई संभावनाओं पर काम किया जाना चाहिए। ब्रसेल्स में हुई अहम बैठक विदेश मंत्री S. Jaishankar ब्रसेल्स में आयोजित Foreign Affairs Council की बैठक में शामिल होने के लिए गए थे। यह बैठक यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों का एक महत्वपूर्ण मंच है। इस बैठक में जयशंकर को यूरोपीय संघ की विदेश और सुरक्षा नीति प्रमुख Kaja Kallas के निमंत्रण पर शामिल होने के लिए बुलाया गया था।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुई बातचीत की जानकारी Ministry of External Affairs की आधिकारिक वेबसाइट पर भी साझा की गई है।
भारत और EU के बीच रणनीतिक सहयोग को लेकर अधिक जानकारी European Union की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
भारत-EU FTA के बाद पहला बड़ा दौरा
यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि जनवरी में प्रधानमंत्री Narendra Modi और यूरोपीय संघ के नेताओं के बीच हुई शिखर बैठक में एक ऐतिहासिक Free Trade Agreement (FTA) पर सहमति बनी थी। उसके बाद यह भारत की ओर से ब्रसेल्स का पहला उच्च स्तरीय दौरा था। यूरोपीय नेताओं से अलग-अलग बैठकें ब्रसेल्स दौरे के दौरान जयशंकर ने कई यूरोपीय नेताओं से अलग-अलग बैठकें भी कीं। उन्होंने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen से मुलाकात की। इसके अलावा जर्मनी और बेल्जियम समेत कई यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों से भी चर्चा की।
यूक्रेन और इंडो-पैसिफिक पर भी चर्चा
India EU energy security talks के दौरान सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा ही नहीं बल्कि अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी बातचीत हुई। इनमें खास तौर पर यूक्रेन संकट और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति शामिल थी। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि वैश्विक स्थिरता बनाए रखने और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
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भारत-EU रणनीतिक साझेदारी पर जोर
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और यूरोपीय संघ ने इस बात पर सहमति जताई कि दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक सहयोग को और ऊंचे स्तर पर ले जाना जरूरी है। दोनों ने इंडो-पैसिफिक समेत कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर नियमित बातचीत जारी रखने की भी बात कही। कई यूरोपीय देशों से द्विपक्षीय वार्ता ब्रसेल्स में रहते हुए जयशंकर ने कई यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों से द्विपक्षीय बैठकें भी कीं।
इनमें शामिल देश थे:
- बेल्जियम
- साइप्रस
- जर्मनी
- ग्रीस
- नीदरलैंड
इन बैठकों में व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
2030 एजेंडा को आगे बढ़ाने पर सहमति
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंध अब एक नए रणनीतिक चरण में प्रवेश कर चुके हैं। दोनों पक्ष “Towards 2030: A Joint India-EU Comprehensive Strategic Agenda” को लागू करने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। इस एजेंडा का उद्देश्य आने वाले वर्षों में व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना है।
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कुल मिलाकर India EU energy security talks ऐसे समय में हुई हैं जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर को देखते हुए भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष मिलकर ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हैं, तो इससे न केवल दोनों क्षेत्रों को फायदा होगा बल्कि वैश्विक स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी।
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