Indian court clears former Delhi chief minister of corruption charges करीब दो साल तक चले हाई-प्रोफाइल मामले में आखिरकार दिल्ली की अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ी राहत दे दी है। कथित आबकारी नीति (Liquor Policy) घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार केस को कोर्ट ने बंद कर दिया और साफ कहा कि इसमें “कोई व्यापक साजिश या आपराधिक मंशा” साबित नहीं होती। यह फैसला ऐसे समय आया है जब इस मामले ने राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा किया था और कई विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी सुर्खियों में रही थी।
क्या था पूरा मामला?
Indian court clears former Delhi chief minister of corruption charges से जुड़ा यह केस 2021 की दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति से संबंधित था। अरविंद केजरीवाल की सरकार ने दावा किया था कि नई नीति से:
- काले बाजार पर रोक लगेगी
- सरकारी राजस्व बढ़ेगा
- शराब लाइसेंस का वितरण पारदर्शी होगा
लेकिन कुछ महीनों बाद दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने आरोप लगाया कि नियमों में हेरफेर कर निजी शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाया गया। इसके बाद जुलाई 2022 में CBI ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया।
मार्च 2024 में गिरफ्तारी
मार्च 2024 में, लोकसभा चुनाव से कुछ हफ्ते पहले, अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया। उनके साथ:
- पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया
- AAP प्रवक्ता संजय सिंह
को भी 2023 में गिरफ्तार किया गया था। तीनों नेताओं को ट्रायल कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट से बार-बार जमानत नहीं मिली। बाद में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली। गिरफ्तारी के बाद ये नेता कई महीनों तक जेल में रहे।
शुक्रवार का बड़ा फैसला
शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि:
आबकारी नीति में “कोई व्यापक साजिश या आपराधिक मंशा” नहीं पाई गई।
Indian court clears former Delhi chief minister of corruption charges के तहत कोर्ट ने न केवल केजरीवाल, बल्कि कुल 23 आरोपियों को भी क्लीन चिट दे दी। फैसले के बाद अदालत परिसर के बाहर केजरीवाल भावुक हो गए। पत्रकारों से बात करते समय उनकी आंखों में आंसू थे। पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया ने उन्हें गले लगाया। केजरीवाल ने कहा:
“आखिर में अन्याय और अधर्म की हार होती है, सच की जीत होती है।”
कोर्ट की CBI को कड़ी फटकार
इस मामले में अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि CBI ने “सिर्फ अटकलों के आधार पर साजिश की कहानी गढ़ने की कोशिश की।” जज ने यह भी कहा कि जांच एजेंसी ने अपने केस को मुख्य रूप से ‘एप्रूवर’ यानी ऐसे लोगों के बयानों पर खड़ा किया, जो सजा में राहत के बदले सरकारी गवाह बन जाते हैं।अदालत ने चेतावनी दी:
“अगर इस तरह की जांच को स्वीकार किया गया, तो यह संवैधानिक सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन होगा। निष्पक्ष जांच ही निष्पक्ष ट्रायल की बुनियाद है।”
साथ ही कोर्ट ने CBI अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश भी की। हालांकि, CBI ने साफ किया है कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
गिरफ्तारी के समय केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) उन्हें और अन्य विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है। उनका कहना था कि केंद्र सरकार राजधानी में पुलिस और जांच एजेंसियों को नियंत्रित करती है। BJP ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया था और कहा था कि जांच पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है। Indian court clears former Delhi chief minister of corruption charges के फैसले के बाद राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
आबकारी नीति क्यों वापस ली गई?
2021 में लागू की गई नई आबकारी नीति को कुछ महीनों बाद वापस ले लिया गया था। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने आरोप लगाया था कि नियमों का दुरुपयोग कर निजी शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाया गया। इसी शिकायत के आधार पर जुलाई 2022 में CBI ने केस दर्ज किया और जांच शुरू हुई।
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23 लोगों को राहत
इस केस में कुल 23 लोगों को अदालत ने राहत दी है। इनमें:
- अरविंद केजरीवाल
- मनीष सिसोदिया
- संजय सिंह
भी शामिल हैं। Indian court clears former Delhi chief minister of corruption charges का यह फैसला आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है।
अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक सफर के बारे में जानने के लिए पढ़ें – Arvind Kejriwal Political Journey.
इस पूरे विवाद को समझने के लिए हमारा विस्तृत विश्लेषण पढ़ें – Delhi Liquor Policy Case Explained.
इस मुद्दे ने AAP vs BJP Political Clash को और तेज कर दिया।
आगे क्या होगा?
CBI ने साफ कहा है कि वह हाई कोर्ट में अपील करेगी। इसका मतलब है कि कानूनी लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। फिलहाल, ट्रायल कोर्ट का फैसला केजरीवाल और अन्य आरोपियों के पक्ष में है।
जनता और राजनीति पर असर
यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील रहा है।
- गिरफ्तारी चुनाव से पहले हुई
- विपक्ष ने इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया
- सत्तापक्ष ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम कहा
अब जब Indian court clears former Delhi chief minister of corruption charges का फैसला सामने आया है, तो इसका असर आने वाले चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है। करीब दो साल की कानूनी प्रक्रिया, महीनों की जेल और तीखी राजनीतिक बयानबाजी के बाद अदालत ने साफ कर दिया है कि आबकारी नीति मामले में कोई आपराधिक साजिश साबित नहीं हुई। Indian court clears former Delhi chief minister of corruption charges यह सिर्फ एक अदालत का फैसला नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के हालिया इतिहास का बड़ा अध्याय बन गया है। अब सबकी नजरें इस पर हैं कि CBI की अपील पर आगे क्या होता है। फिलहाल, केजरीवाल और AAP के लिए यह बड़ी राहत और राजनीतिक संजीवनी मानी जा रही है।
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