दूरी, खर्च और असुविधा बनी बाधा: केरल के सैकड़ों उम्मीदवार NEET PG 2025 से हुए बाहर
देशभर में मेडिकल स्नातकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा मानी जाने वाली NEET-PG 2025 परीक्षा 3 अगस्त को आयोजित की जा रही है। लेकिन इस बार, परीक्षा में शामिल होने जा रहे केरल के हजारों छात्रों को एक ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ा है, जो उन्हें परीक्षा में शामिल होने से रोक रही है। उन्हें परीक्षा केंद्र उनके राज्य से सैकड़ों किलोमीटर दूर, अन्य राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना में आवंटित किए गए हैं। इस स्थिति के कारण कई अभ्यर्थियों को मजबूरी में परीक्षा छोड़नी पड़ रही है।
बड़ी संख्या में केरल के उम्मीदवार, सीमित केंद्र
राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBEMS) यह दावा करता है कि हर जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र सुनिश्चित किया गया है। लेकिन केरल से इस साल लगभग 20,000 उम्मीदवारों ने आवेदन किया है, जिससे केंद्रों की संख्या पर्याप्त नहीं रही। परिणामस्वरूप, शुरुआती स्लॉट भरने के बाद हजारों उम्मीदवारों को राज्य से बाहर के केंद्र दे दिए गए।
कई छात्रों ने आवेदन करते समय अपने निवास स्थान के निकटवर्ती शहरों को प्राथमिकता दी थी, लेकिन उन्हें आश्चर्यजनक रूप से अन्य राज्यों के सुदूर शहरों में केंद्र मिल गए।
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गर्भवती महिला, युवा मांएं बनीं सबसे अधिक प्रभावित
थिरुवनंतपुरम की एक उम्मीदवार डॉ. कविता (बदला हुआ नाम), जो आठ महीने की गर्भवती हैं, को तेलंगाना में परीक्षा केंद्र मिला है। उन्होंने कहा,
“मैं इस बार परीक्षा नहीं दे रही हूँ। यात्रा और ठहरने का खर्च मेरे लिए और मेरे परिवार के लिए बहुत अधिक है।”
उन्हीं की तरह कई युवा माताएं भी इस बार परीक्षा से पीछे हट गई हैं। उन्होंने बताया कि ₹4000 आवेदन शुल्क चुकाने के बाद भी वे परीक्षा नहीं दे पा रही हैं, जिससे उन्हें मानसिक और आर्थिक नुकसान हुआ है।
यात्रा, ठहराव और अंतिम समय की जानकारी बनी बड़ी समस्या
NEET PG का एडमिट कार्ड 31 जुलाई को जारी हुआ, और उसी दिन उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र की सही जानकारी मिली। यानी परीक्षा से सिर्फ दो दिन पहले। इससे छात्रों को यात्रा, होटल बुकिंग, समय-प्रबंधन और मानसिक तैयारी में कठिनाई हुई।
जनरल प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष डॉ. अाशिक बशीर ने बताया:
“अगर मुझे कोल्लम जैसे केंद्र मिलते तो मैं वहां आराम से पहुंच सकता था। लेकिन विशाखापट्टनम जैसे दूरदराज के स्थानों में केंद्र होने पर हम न तो यात्रा की योजना बना सकते हैं, न ही होटल बुक कर सकते हैं।”
यात्रा खर्च और होटल दरों में इज़ाफा
परीक्षा के चलते कई शहरों में होटलों की दरें बढ़ गई हैं। साथ ही, रेल और बस की टिकटों की उपलब्धता भी एक बड़ी समस्या बन गई है। कई छात्र अकेले यात्रा नहीं कर सकते, खासकर महिलाएं और गर्भवती उम्मीदवार, जिन्हें परिवार के सदस्य के साथ जाना पड़ता है। इससे खर्च और बढ़ जाता है।
सिस्टम में खामी या अनदेखी?
NBEMS की प्रणाली के अनुसार, अगर कोई उम्मीदवार द्वारा चुना गया शहर उपलब्ध नहीं होता, तो उन्हें उनके निवास स्थान के पास का कोई और केंद्र दिया जाता है। लेकिन इस बार उम्मीदवारों को लग रहा है कि आवंटन प्रणाली में कुछ गड़बड़ी हुई है या फिर पूर्णतः रैंडम तरीके से केंद्र बांटे गए हैं।
IMA जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क के राज्य सचिव डॉ. विवेक के. बी. ने NBEMS से मांग की है कि वह परीक्षा केंद्र बदलने के लिए पोर्टल दोबारा खोले, ताकि उम्मीदवार अपने लिए उचित और व्यावहारिक विकल्प चुन सकें।
विगत वर्षों में मिलती थी राहत, इस बार नहीं
पिछले वर्षों में कई बार अदालतों या सांसदों की याचिकाओं के माध्यम से परीक्षा केंद्रों में बदलाव की अनुमति दी जाती थी। पिछले साल परीक्षा दो शिफ्टों में आयोजित की गई थी। लेकिन इस साल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार परीक्षा एक ही शिफ्ट में ली जा रही है, जिससे बोर्ड के पास विकल्प सीमित हो गए हैं। फिर भी, छात्रों को कोई राहत नहीं मिली है।
महत्वपूर्ण निर्देश और परीक्षा की व्यवस्था
इस वर्ष की परीक्षा 3 अगस्त को सुबह 9:00 से दोपहर 12:30 बजे तक एकल शिफ्ट में आयोजित की जा रही है। NBEMS द्वारा उम्मीदवारों के लिए निम्नलिखित निर्देश जारी किए गए हैं:
- रिपोर्टिंग टाइम: परीक्षा केंद्र के प्रवेश द्वार सुबह 8:30 बजे बंद हो जाएंगे। उम्मीदवारों को इससे पहले पहुंचना अनिवार्य है।
- एडमिट कार्ड: रंगीन प्रिंट में A4 साइज पेपर पर दो पेज का एडमिट कार्ड लाना अनिवार्य है।
- प्रमाण-पत्र और दस्तावेज़: सभी अनिवार्य दस्तावेज़ साथ लाना आवश्यक है, वरना प्रवेश नहीं मिलेगा।
- मेडिकल प्रमाण पत्र: यदि कोई उम्मीदवार दवाई, मास्क या अन्य उपकरण लाना चाहता है, तो संबंधित मेडिकल दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
- मेहंदी या रंग न लगाएं: उम्मीदवारों के उंगलियों पर मेहंदी या कोई रंग नहीं होना चाहिए।
- Bio-break नहीं मिलेगा: पंजीकरण के बाद और परीक्षा शुरू होने तक शौचालय जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- क्या न लाएं: पानी की बोतल, पेन, पेंसिल, कागज आदि लाने की अनुमति नहीं है। परीक्षा के दौरान स्क्रीन पर एक डिजिटल कैलकुलेटर उपलब्ध कराया जाएगा।
- अनुचित साधनों पर सख्त रोक: परीक्षा में किसी भी प्रकार की नकल या अनुचित साधन अपनाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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समाधान की आवश्यकता
NEET PG जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में पारदर्शिता, समानता और व्यावहारिकता अत्यंत आवश्यक है। लेकिन इस बार केरल के हजारों उम्मीदवारों के अनुभव ने यह दिखा दिया कि सिर्फ परीक्षा आयोजित करना ही काफी नहीं, बल्कि उसे सभी के लिए सुलभ बनाना भी जिम्मेदारी है।
सरकार और NBEMS को चाहिए कि वे केंद्र आवंटन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएं, परीक्षा केंद्र बदलने की सुविधा दें, और विशेष परिस्थितियों (जैसे गर्भवती महिलाएं, दिव्यांग उम्मीदवार आदि) के लिए विशेष प्रावधान लागू करें।
अगर इन मुद्दों को नजरअंदाज किया गया, तो योग्य और मेहनती छात्रों को बिना किसी गलती के पीछे हटना पड़ेगा, जो हमारे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी नुकसानदायक है।