नई दिल्ली – ऑनलाइन गेमिंग को लेकर सरकार 2025 से रियल मनी गेम्स (RMG) यानी पैसे से खेले जाने वाले गेम्स पर बैन लगाने की तैयारी कर रही है। इसमें स्किल बेस्ड गेम्स भी शामिल होंगे। सरकार का दावा है कि यह कदम लत, आर्थिक बर्बादी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी समस्याओं को रोकने के लिए है। लेकिन सवाल ये है कि क्या बैन सचमुच समाधान है, या फिर ये एक आर्थिक आत्मघाती फैसला साबित होगा?
बैन का इतिहास: चाहा कुछ और, हुआ कुछ और
इतिहास गवाह है कि बैन शायद ही कभी सफल हुए हों। शराबबंदी से लेकर ड्रग्स तक, हर जगह बैन ने काले बाजार को जन्म दिया। लोग प्रतिबंधित चीजों तक पहुंचने के नए रास्ते ढूंढ लेते हैं।
तमिलनाडु और कर्नाटक में ऑनलाइन गेम्स पर बैन की कोशिशें पहले भी हुईं, लेकिन हाई कोर्ट्स ने इन्हें असंवैधानिक बताकर खारिज कर दिया। नतीजा ये हुआ कि खिलाड़ी और पैसा दोनों विदेशी प्लेटफॉर्म्स की तरफ चले गए।
3.7 बिलियन डॉलर के उद्योग पर संकट
आज भारत की रियल मनी गेमिंग इंडस्ट्री 3.7 अरब डॉलर (AIGF, 2024) की है।
- 2,000 से ज्यादा स्टार्टअप्स इस सेक्टर से जुड़े हैं।
- करीब 2 लाख लोगों को इसमें रोजगार मिला है।
- पिछले पांच साल में इस सेक्टर ने 23,000–25,000 करोड़ रुपये FDI खींचा है।
- हर साल सरकार को लगभग 20,000 करोड़ रुपये टैक्स के रूप में मिलता है।
अगर बैन लागू हुआ तो 400 कंपनियां बंद हो जाएंगी, लाखों लोग बेरोजगार होंगे और सरकारी खजाने को बड़ा झटका लगेगा। ये पैसा स्कूल, सड़क और अस्पताल बनाने में लग सकता था, लेकिन अब काले बाजार की जेब में जाएगा।
कानून सख्त है लेकिन प्रभावी नहीं है।
प्रस्तावित 2025 बैन में सख्त सजा रखी गई है –
- 3 साल जेल
- 1 करोड़ रुपये का जुर्माना
लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये कदम लोगों को अनरेगुलेटेड विदेशी प्लेटफॉर्म्स की ओर धकेल देगा। वहां धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और यहां तक कि आतंकवाद फंडिंग का भी खतरा है।
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समाधान प्रतिबंध नहीं, रेगुलेशन है
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बैन नहीं, रेगुलेशन ही सही रास्ता है।
- उम्र की पाबंदी (Age Verification)
- खर्च की लिमिट
- समय सीमा
- पैरेंटल कंट्रोल
- पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन
- काउंसलिंग और ट्रीटमेंट सेंटर
इन उपायों से लत पर काबू पाया जा सकता है, जबकि रोजगार और सरकार की कमाई भी बची रहेगी।
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परिणाम: खेल बंद नहीं होगा, रास्ता बदल जाएगा
अनुभव बताता है कि बैन से गेमिंग खत्म नहीं होगी, बल्कि लोग गुपचुप रास्ते अपनाएंगे। इससे नुकसान सिर्फ भारत को होगा – रोजगार जाएगा, टैक्स राजस्व गिरेगा और काला बाजार बढ़ेगा।
यानी सरकार को अब सोचना होगा कि क्या वो खेल के नियम बनाएगी या खेल ही खत्म कर देगी।
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