10000 करोड़ का प्रोडक्शन, चौथा मिशन: प्रोजेक्ट वाली कंपनी Axiom Space में शुभांशु शुक्ला का स्पेस कितना बड़ा है?

एक्सिओम स्पेस

भारत के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने इतिहास रच दिया है। वे एक्सिओम मिशन (Axiom Space) के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्रा पर जा रहे हैं। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि जिस कंपनी एक्सिओम स्पेस के साथ शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में उतरे हैं, वह न केवल अमेरिका की एक प्रमुख निजी एयरोस्पेस कंपनी है, बल्कि इसका चौथा मिशन वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। एक्सिओम स्पेस की इस ऐतिहासिक उड़ान ने भारत समेत पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। तो आइए जानते हैं कि एक्सिओम स्पेस क्या है, इसका मिशन कितना बड़ा है और यह कंपनी के भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों की दिशा क्यों तय कर रहा है। कौन हैं शुभांशु शुक्ला? ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भारतीय सितारों के एक अनुभवी पायलट हैं। उन्होंने एक्स-4 मिशन के अंतरिक्ष में कदम रखा, जो पूरी तरह से निजी अंतरिक्ष मिशन है। अब तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को मुख्य रूप से इसरो या नासा जैसे सरकारी यात्रियों के जरिए अंतरिक्ष मिशन पर भेजा जाता था, लेकिन शुभांशु शुक्ला की इस उड़ान ने इस चलन को पीछे छोड़ दिया है।

एक्सिओम स्पेस: यह कौन सी कंपनी है?

एक्सिओम स्पेस अमेरिका की एक निजी एयरोस्पेस कंपनी है, जिसका मुख्यालय ह्यूस्टन, टेक्सास में है। कंपनी की स्थापना 2016 में हुई थी और तब से यह लगातार मानव अंतरिक्ष मॉल, अंतरिक्ष पर्यटन, पर्यटन और वाणिज्यिक अंतरिक्ष स्टेशन निर्माण के क्षेत्र में काम कर रही है।

एक्सिओम का लक्ष्य अंतरिक्ष को मनुष्यों के लिए अगला वास्तविक वाणिज्यिक क्षेत्र बनाना है।

कंपनी का मूल्यांकन: 10,000 करोड़ रुपये (लगभग 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर)

संस्थापक: माइकल सुफ्रेडिनी (पूर्व नासा अधिकारी)

विशेषता: एक्सिओम एक निजी अंतरिक्ष स्टेशन विकसित करने वाला पहला संगठन है जो आईएसएस (अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन) की जगह ले सकता है।

चौथा मिशन: एक्स-4 क्यों खास है?

एक्स-4, यानी एक्सिओम मिशन 4, स्पेसएक्स के सहयोग से निष्पादित कंपनी का चौथा मानवयुक्त मिशन है। यह मिशन फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से शुरू हुआ था।

एक्स-4 की विशेषताएं:

शुभांशु शुक्ला समेत 4 अंतरिक्ष यात्री इस मिशन का हिस्सा हैं।

इस मिशन के तहत क्रू को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) भेजा गया है।

इस मिशन का उद्देश्य अंतरिक्ष में वैज्ञानिक प्रयोगों और तकनीकी लक्ष्यों को लागू करना है।

यह मिशन एक्सिओम स्पेस के स्पेस स्टेशन से जुड़े मिशनों का भी हिस्सा है, जिसे 2026 तक लॉन्च किया जाना है।

Axiom Space के पिछले मिशन

  1. Ax-1 (2022): पहला पूरी तरह से प्राइवेट अंतरिक्ष मिशन, जो ISS गया।
  2. Ax-2 (2023): सऊदी अरब की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री को स्पेस में भेजा गया।
  3. Ax-3 (2024): विभिन्न देशों के विशेषज्ञों को लेकर अंतरिक्ष में गया।

अब Ax-4, जिसमें भारत के शुभांशु शुक्ला जैसी प्रतिष्ठित शख्सियत शामिल हैं, Axiom Space के लिए एक और मील का पत्थर है।

क्यों अहम है Axiom का मॉडल?

Axiom Space का मॉडल आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष की दुनिया को पूरी तरह बदल सकता है। जिस तरह से यह कंपनी स्पेस टूरिज्म, प्राइवेट रिसर्च, और कॉमर्शियल स्पेस स्टेशन जैसे क्षेत्रों में काम कर रही है, वह सरकारी एजेंसियों पर निर्भरता को कम कर सकती है। Axiom का अगला बड़ा लक्ष्य है Axiom Station, एक ऐसा प्राइवेट स्पेस स्टेशन जो 2030 के बाद ISS को रिप्लेस कर सकता है। इससे न केवल निजी शोधकर्ताओं और कंपनियों को अंतरिक्ष में काम करने का मौका मिलेगा, बल्कि भविष्य में वहां पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियाँ भी संभव होंगी।

भारत के लिए क्या मायने रखता है यह मिशन?
शुभांशु शुक्ला का Ax-4 मिशन भारत के लिए गर्व का विषय है। यह पहली बार है जब कोई भारतीय, पूर्ण रूप से एक प्राइवेट अमेरिकी कंपनी के मिशन के तहत अंतरिक्ष में गया है।इससे भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर को भी नई दिशा मिलेगी, विशेषकर Skyroot, Agnikul, और Pixxel जैसी भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए रास्ते मिल सकते हैं।

Axiom Space आज के दौर की सबसे उभरती हुई प्राइवेट एयरोस्पेस कंपनियों में से एक है, जिसकी 10,000 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन और चार सफल मानव मिशन इसकी क्षमता का प्रमाण हैं। शुभांशु शुक्ला का Ax-4 मिशन न केवल इस कंपनी के लिए बल्कि भारत के लिए भी एक ऐतिहासिक क्षण है। जहां अंतरिक्ष की दुनिया पहले केवल सरकारों तक सीमित थी, वहीं अब Axiom जैसी कंपनियां यह साबित कर रही हैं कि भविष्य निजी हाथों में भी सुरक्षित और संभावनाओं से भरा है।

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